शोध
राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान का बाल संरक्षा संभाग बाल संरक्षा से संबंधित विषयों पर शोध करने तथा आंकड़े इकट्ठे करने का कार्य करता है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा यूनीसेफ, इंडिया कंट्री ऑफिस, नयी दिल्ली के लिए अपने बाल संरक्षा संभाग के द्वारा राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान '' देखभाल और संरक्षा के जरूरतमंद बच्चों (जिनमें एच.आइ.वी.एड्स तथा मादक द्रव्यों के दुरूपयोग से प्रभावित बच्चे भी शामिल हैं) के लिए उपलब्ध सहायता और आवश्यक सेवाओं के आकलन'' का कार्य संपादित कर रहा है।
यह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, यूनीसेफ तथा राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान के द्वारा साथ मिलकर चलाया जा रहा है। प्रभावित बच्चों की बर्तमान स्थिति के बारे में आलेखों की समीक्षा की गई और उपलब्ध द्वितीयक श्रोतों के आधार पर एक अंतरिम रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है जिसमे आंध्रप्रदेश, असम, केरल, महाराष्ट्र, मनीपुर, मिजोरम, नगालैंड तथा तमिलनाडु जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में सेवाओं की आव6यकता और उपलब्धता को रेखांकित किया गया है।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है।
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विशेष संरक्षा और देखभाल के जरूरत मंद बच्चों के लिए आव6यक सेवाओं का आकलन। यह आकलन खासकर एच.आई.वी.एड्स से संक्रमित और प्रभावित, मादक द्रव्यों के दुरूपयोग तथा खरीद-बिक्री तथा यौन शोषण के शिकार बच्चों को केंद्र में रख कर किया गया। |
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ऐसे बच्चों के लिए उपलब्ध सेवाओं तथा कार्यक्रमों का आकलन |
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देखभाल और संरक्षा के जरूरतमंद बच्चों के कार्यक्रमों को लागू करने में पायी जाने वाली सेवा संबंधी कमियों की पहचान |
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बच्चों के ऐसे नाजुक समूह के लिए बाल-केंद्रित एवं विशिष्ट कार्यक्रमों को प्रारंभ करने के लिए आवश्यक रणनीति सुझाना। |
यह लगातार चलने वाली गतिविधि है और इसके अंतर्गत सेवाओ को उपलब्ध करवाने तथा इसमें पायी जाने वाली कमियों पर विचार करने के लिए दो क्षेत्रीय मंत्रणाओं का आयोजन किया जा चुका है। इस कार्यक्रम की अनुशांसाओं तथा सुझावों पर विचार किया जा रहा है तथा अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है जिसे मुद्रित किया जाएगा और व्यापक रूप से प्रसारित किया जाएगा।
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